श्रद्धालु जनों की संकटों से रक्षा करने वाला अनन्त-सूत्र बंधन का त्यौहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है । भविष्य पुराण के अनुसार जुए में पांडव राजपाट हारकर जब जंगल में भटक रहे थे और कई प्रकार के कष्टों को झेल रहे थे तब भगवन श्री कृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी और उसी व्रत के प्रभाव से पांडव अपने कष्टों से मुक्त हुए । इस दिन भारत वर्ष में अनंत भगवन की पूजा करते हैं और संकटों से रक्षा हेतु भगवन को अनन्त सूत्र बांधने का भी विधान है ।
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