| श्री राम जय राम जय जय राम |
| चौपाई | :- | उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥ | |
| सन्दर्भ | :- | यह चौपाई बाल काण्ड के आरम्भ में सत्संग वर्णन के प्रसंग में है । | |
| अर्थ | :- | (जो वेषधारी ठग हैं) एक न एक दिन उनका सत्य सामने आ ही जाता हैं, अंत तक उनका कपट नहीं निभता, जैसे कालनेमि, रावण और राहु का हाल हुआ। । | |
| समाधान | :- | इस कार्य में भलाई नहीं है। कार्य की सफलता में संदेह है। । | |
| श्री राम श्लोकी प्रश्नावली - गीता प्रसार |
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