योगी की परिभाषा गीता प्रसार 08:09 गीता प्रसार जो साधक इस जीवन में शारीर का नाश होने से पहले ही काम-क्रोध से उत्पन होने वाले वेग को सहन करने में समर्थ हो जाता है , वही पुरुष योगी है और वही सुखी है |
0 Komentar