परमात्मा के दर्शन कैसे हों ?

जो पुरुष परमात्मा ही सब कुछ हैं ऐसे भाव में स्थित होकर संपूर्ण जीवों की आत्मा के रूप में स्थित मुझ परमेश्वर को ही देखता है और संपूर्ण जीव मेरे द्वारा ही बनाये गए हैं तथा मैं ही सबकी आत्मा हूँ ऐसा मानता है उसके लिए मैं कभी अदृश्य नहीं होता एवं वह भक्त कभी मेरे लिए अदृश्य नहीं होता है |


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